महापर्व छठ का त्योहार | छठी मईया की कथा | Story Behind Chhath Festival – Jharkhand Blogs

हमारा भारतवर्ष त्योहारों से घिरा हुआ है ।भारत ऐसा देश है जिसे त्योहारों की भूमि कहा जाता है । जितने त्योहार भारत में मनाए जाते है शायद ही किसी देश में मनाए जाते होंगे । भारत में त्योहारों का सिलसिला यूं पूरे साल चलता रहता है , जिसकी सूची काफी लंबी है।  उनमें से एक मुख्य है छठ महापर्व। 

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कहां मनाया जाता है छठ ?

भारत के बिहार , झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के साथ साथ उत्तर पूर्वी भारत में मनाए जाने वाले पर्वो में से छठ महापर्व मुख्य पर्व है।धीरे धीरे यह त्योहार प्रवासी भारतीयों के साथ साथ पूरे विश्व भर में प्रचलित व प्रसिद्ध हो चुका है । चार दिवसीय पर्व नहाय खाय से लेकर उगते हुए सूर्य को अरघ देने तक चलने वाला इस पर्व का अपना एक ऐतिहासिक महत्व है ।

 

छठ पर्व की शुरुवात कैसे हुई ?

छठ पर्व के शुरुवात होने के पीछे कई सारी पौराणिक कहानियां प्रचलित हैं । पुराण में छठ पूजा के पीछे की कहानी राजा प्रियवंत को लेकर है ।कहते हैं राजा प्रियवंत और उनकी पत्नी मालिनी को कोई संतान की प्राप्ति नहीं हुई थी ।तब महर्षि कश्यप ने पुत्र की प्राप्ति के लिए यज्ञ कराकर प्रियवंत की पत्नी को प्रसाद के रूप में यज्ञ के आहुति के लिए बनायी गई खीर दी । इससे उन्हें पुत्र की प्राप्ति तो हुई लेकिन वह पुत्र मृत पैदा हुआ । 

प्रियवंत पुत्र को लेकर शमशान गए और पुत्र वियोग में प्राण त्यागने लगे । उसी वक्त भगवान की मानस पुत्री ” देवसेना ” प्रकट हुई । उन्होंने राजा से कहा कि क्योंकि वो सृष्टि की मूल प्रवृत्ति के छठे अंश में उत्पन्न हुई है , इसी कारण वह षष्ठी कहलाती है ।उन्होंने राजा को अपनी पूजा और दूसरों को पूजा करने के लिए प्रेरित करने के लिए कहा । राजा प्रियवंत ने पुत्र के इच्छा के कारण देवी षष्ठी की व्रत की और उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई ।

कहते हैं यह पूजा कार्तिक शुक्ल की षष्ठी को हुई थी और तभी से यह छठ पूजा होती है । 

इस कथा के अलावा एक कथा राम सीता जी से भी जुड़ी हुई है ।पौराणिक कथाओं के मुताबिक जब राम सीता 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे ,तब रावण वध के पाप से मुक्त के लिए उन्होंने ऋषि मुनियों के आदेश पर राज्य सूर्य यज्ञ करने का फैसला लिया ।

पूजा के लिए उन्होंने मुद्गल ऋषि को उन्होंने आमंत्रित किया ।मुद्गल ऋषि ने मां सीता पर गंगा जल छिड़क कर पवित्र किया और कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष को षष्ठी तिथि को सूर्य देव की उपासना करने का आदेश दिया ।जिसे सीता माता ने मुद्गल ऋषि के आश्रम में रह कर छह दिन तक सूर्य देव भगवान की पूजा की थी ।

 

छठ महापर्व मनाने की विधि 

छठ पर्व किस प्रकार मनाया जाता है ?

छठ महापर्व चार दिवसीय उत्सव है । इसकी शुरुवात कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को तथा समाप्ति कार्तिक शुक्ल सप्तमी को होती है ।इस दौरान छठ करने वाले लगातार 36 घंटे का व्रत रखते हैं । छठ के महापर्व में चार दिन कुछ इस प्रकार होते हैं ।

1. नहाय खाय

2. खरना 

3. संध्या अर्घ्य

4. सुबह का अर्घ्य

 

1. नहाय खाय – छठ पर्व का पहला दिन ,कार्तिक शुक्ल चतुर्थी नहाय खाय के रूप में मनाया जाता है । सबसे पहले घर की सफाई कर उसे पवित्र बना लिया जाता है । इसके पश्चात छठ व्रत स्नान कर पवित्र तरीके से बने शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण कर व्रत की शुरुवात करते हैं। घर के सभी सदस्य व्रती के भोजन करने के बाद ही भोजन ग्रहण करते हैं ।भोजन के रूप में कद्दू , दाल और चावल ग्रहण किया जाता है। यह दाल चने की होती है । 

 

2. खरना – छठ का दूसरा दिन ,कार्तिक शुक्ल पंचमी खरना के रूप में मनाया जाता है। इस दिन व्रतधारी दिन भर का उपवास रखने के बाद शाम को भोजन करते हैं। इसे खरना कहा जाता है ।खरना का प्रशाद लेने के लिए आस पास के सभी लोगों को आमंत्रित किया जाता है । प्रसाद के रूप में गन्ने के रस या गुड़ से बने हुए खीर के साथ दूध , चावल का पिठा और घी चुप्पी रोटी बनाई जाती है ।इसमें नमक या चीनी का प्रयोग पूरी तरह से वर्जित होता है । इस दौरान पूरे घर की स्वक्षता पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

 

3. संध्या अर्घ्य – तीसरे दिन ,कार्तिक शुक्ल षष्ठी को दिन में छठ प्रसाद बनाया जाता है । जिस तरह से से सैकड़ों साल पहले यह पर्व मनाया जाता था वहीं तरीका आज भी है । इस पर्व के लिए बनाए गए सभी प्रसाद घर में तैयार किया जाता है ।ठेकुआ और कसार के अलावा और भी को पकवान बनाए जाते हैं वह पूरे घर की सफाई का ध्यान रखते हुए घरों में ही तैयार करते हैं ।

ठेकुआ गुड और आटे से तैयार होता है वहीं कसार चावल के आटे से और गुड से तैयार होता है। इसके अलावा इस महापर्व में फलों और सब्जियों का खास महत्व है । छठ के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बर्तन या तो बांस के बने होते हैं या फिर मिट्टी के।ये सभी वस्तुएं प्रकृति को किसी भी प्रकार से नुकसान नहीं पहुंचाती हैं। 

शाम को पूरी तैयारी और व्यवस्था कर बांस की टोकरी /दऊरा में सजाया जाता है और व्रती के साथ परिवार और पड़ोस के सारे लोग सूर्य को अर्घ्य देने घाट पर पहुंचते हैं ।सभी छठ व्रती एक नियत तालाब या नदी के किनारे इकट्ठा होकर सामूहिक रूप से अर्घ्य दान संपन्न करते हैं। सूर्य को दूध व पानी का अर्घ्य दिया जाता है । तथा छठी मईया की प्रसाद भरे सूप से पूजा की जाती है । इस समय घाट पर कुछ घंटों के लिए मेले जा दृश्य बन जाता है।

4. सुबह का अर्घ्य – चौथे दिन कार्तिक शुक्ल सप्तमी को सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है । छठ व्रती वहीं पुनः इकट्ठा होते हैं जहां उन्होंने शाम को अर्घ्य दिया था ।पुनः पिछले शाम की पुनावृति होती है । अंत में व्रती कच्छे दूध एवं शरबत पीकर तथा थोड़ा प्रसाद खाकर व्रत पूरा करते हैं ।

कौन हैं छठी मईया ?

वेदों के मुताबिक छठी मैया को ऊर्जा की देवी को कहा गया है ।छठी मैया के बारे में कहा जाता है कि छठी मईया सूर्य देव की बहन हैं । उनकी पूजा करने से और उनके गीत गाने से सूर्य भगवान प्रसन्न होते हैं और सभी मनोकामनाएं भी पूर्ण होती हैं ।

रीति-रिवाज़ जो छठ को बनाते हैं महापर्व

छठ महापर्व पूरी तरह से स्वच्छता और पवित्रता को ध्यान में रखते हुए मनाया जाने वाला त्योहार है । इसलिए इस महापर्व में कुछ नियम ऐसे भी हैं पूरी तरह से वर्जित माना जाता है ।जैसे की 

बिना सिलाई के कपड़े पहनना – ऐसा नियम इसलिए बनाया गया था क्योंकि किसी भी कपड़े के सिलाई के दौरान कई बार दर्जी धागे को अपने मुंह से लेते है जिससे वस्त्र जूठा हो जाता है । इसलिए पहले के समय में महिला व्रती को बिना ब्लाउज के ही और पुरुष को केवल धोती में ही अर्घ्य देने का प्रावधान था । परन्तु आजकल के नवयुग में सब बदल सा गया है । 

चीनी की जगह गुड का प्रयोग करना – छठ के अलावा भी किसी भी पूजन सामग्री में चीनी का प्रयोग हमेशा से वर्जित माना गया है । क्योंकि चीनी के बनने के दौरान इसके सफाई में जनवरी के हड्डियों का प्रयोग किया जाता है जो किसी भी पूजा की पवित्रता  को भंग करने के लिए काफी है । इसलिए हर पूजा की भांति इस महापर्व छठ में भी चीनी के जगह पर गुड का प्रयोग किया जाता है ।

तो आज हमने जाना छठ महापर्व का महत्व ,इस महापर्व को मानने को विधि , कौन है छठी मैया , छठ के त्योहार की शुरुवात खा से हुई तथा इसके पीछे कई सारी पौराणिक काथाओं के बारे में ।कैसा लगा यह लेख आपको हमें बताए हमारे इंस्टाग्राम य फेसबुक में हमसे जुड़कर । मिलते है अगले किसी और भी मजेदार लेख के साथ तब तक के लिए धन्यवाद 

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